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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 45, Verse 16

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 45, verse 16 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 45 · श्लोक 16

संस्कृत श्लोक

भूमभूतं स्वकायोत्थमपश्यन्निपुणं दृशा । राघवाऽमहता स्वान्तः किमज्ञ इव मुह्यसि ॥ १६ ॥

हिन्दी अर्थ

अपने शरीर से मूँज से ईषिका की तरह पृथक्‌ किये हुए भूमारूप को परमार्थदृष्टि से अपने अन्तःकरण में न देखते हुए आप परिच्छिन्न आत्मदर्शन से अज्ञ की नाई क्यों मोह को प्राप्त हो रहे हैँ ?