Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 45, Verse 17
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 45, verse 17 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 45 · श्लोक 17
संस्कृत श्लोक
मृगतृष्णा यथा तापान्मनसो निश्चयात्तथा ।
असन्त इव दृश्यन्ते सर्वे ब्रह्मादयोऽप्यमी ॥ १७ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे मरुभूमि में सूर्य की किरणों से
मृगजल दिखाई देता हे वैसे ही मन के संकल्प से असत्य सब ब्रह्मा आदि दिखाई देते हैं