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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 45, Verse 8

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 45, verse 8 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 45 · श्लोक 8

संस्कृत श्लोक

न तदस्ति च यन्नाम चेतःसंकल्पमम्बरम् । न करोति न चाप्नोतिदुर्गमप्यतिदुष्करम् ॥ ८ ॥

हिन्दी अर्थ

चित्त की संकल्पमात्र से असत्रचना प्राप्त करने की शक्ति प्रसिद्ध है, इसलिए भी पूर्वोक्त अर्थ की उपपत्ति होती है, ऐसा कहते है। वह वस्तु नहीं है, जिस अर्थशून्य संकल्परूप वस्तु की मन रचना नहीं करता । एेसी दुर्गम दुष्कर वस्तु भी नहीं है, जिसे मन प्राप्त नहीं करता