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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 47, Verse 68

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 47, verse 68 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 47 · श्लोक 68

संस्कृत श्लोक

न तदस्ति न यत्तस्मिन्नेकस्मिन्विततात्मनि । संकल्पकलनाजालमनाख्ये नोपपद्यते ॥ ६८ ॥

हिन्दी अर्थ

ऐसा कोई संकल्पकल्पनाओं का समूह नहीं है, जो सर्वव्यापक, अद्वितीय, नामरूपरहित, परमतत्त्व में उत्पन्न न हो