Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 48, Verse 41
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 48, verse 41 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 48 · श्लोक 41
संस्कृत श्लोक
इत्युक्ते मुनिपुत्रेण सर्वदेवमुखं शिखी ।
एवमस्तु तवेत्युक्त्वा जगामान्तर्द्धिमीश्वरः ॥ ४१ ॥
हिन्दी अर्थ
मुनिपुत्र के एेसा कहने पर सब देवताओं के
मुखरूप अग्निदेव (वृक्षों के ऊपर ही तुम्हारी स्थिति हो" ऐसा कहकर अन्तर्हित हो गये