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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 48, Verse 42

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 48, verse 42 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 48 · श्लोक 42

संस्कृत श्लोक

तस्मिन्नन्तर्हिते देवे क्षणात्सान्ध्य इवाम्बुजे । पूर्णकामः कुमारोऽसौ पूर्णेन्दुरिव चाबभौ ॥ ४२ ॥

हिन्दी अर्थ

सायंकालीन कमल के समान अग्निदेव के क्षण भर में अन्तर्हित होने पर पूर्णकाम वह मुनिकुमार पूर्ण चन्द्रमा के समान सुशोभित हुआ