Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 48, Verse 43
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 48, verse 43 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 48 · श्लोक 43
संस्कृत श्लोक
अधिगताभिमताननमण्डलद्युतिभरेण जहास स तुष्टिमान् ।
शशिनमाप्तकलाकुलमम्बुजं विकसितं च सितस्मितशोभिना ॥ ४३ ॥
हिन्दी अर्थ
अत्यन्त सन्तोष को प्राप्त हुए उस मुनिकुमार ने अभीष्ट
वर की प्राप्ति द्वारा उत्पन्न हुई मुख की कान्ति से, जो मन्द हास्य से अधिक सुशोभित हो रही थी,
सम्पूर्ण कला से युक्त चन्द्रमा को ओर विकसित कमल को फीका कर दिया