Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 49, Verse 4
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 49, verse 4 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 49 · श्लोक 4
संस्कृत श्लोक
कच्छैरुरुगुड्डच्छाच्छमञ्जरीपुञ्जकञ्जरैः ।
आस्यैरिव सताम्बूलैर्हसन्तं वनमालिकाः ॥ ४ ॥
हिन्दी अर्थ
गुड्डच्छ लताओं की दन्त पंक्ति के समान स्थित स्वच्छ
मंजरी के पुंज से केसर युक्त हुए, ओस के विन्दुओं को सीकररूप में परिणत कर देनेवाले पल्लवरूपी
ताम्बूलयुक्त मुखो से मानों वह वनराजि का परिहास कर रहा था