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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 49, Verse 8

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 49, verse 8 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 49 · श्लोक 8

संस्कृत श्लोक

मग्नोन्मग्नैः प्रतिस्कन्धमाश्रितैश्चमरैः सितैः । पूर्णं मुहुर्दृष्टनष्टैः संवत्सरमिवेन्दुभिः ॥ ८ ॥

हिन्दी अर्थ

प्रत्येक स्कन्ध प्रदेश में खोखलों मे रहनेवाले, भीतर स्थित आधे शरीर से खोखले मेँ निमग्न ओर बाहर निकले हुए आधे शरीर से उन्मग्न तथा क्षण में दिखाई देने और क्षण में नष्ट होनेवाले सफेद चमर मृगो से वह ऐसे पूर्ण था, जैसे कि चन्द्रमाओं से संवत्सर पूर्ण रहता है