Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 50, Verse 10
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 50, verse 10 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 50 · श्लोक 10
संस्कृत श्लोक
महार्णवपयःपूरनवमण्डनदर्पणाः ।
ऋक्षौघघर्मपुलका भुवनान्तःपुरान्तराः ॥ १० ॥
हिन्दी अर्थ
महासागर की जलराशि ही नूतन अलंकारो को देखने के लिए उनके दर्पण थे नक्षत्रपंक्तियाँ ही
उनके स्वेदबिन्दु थे, भुवनका मध्य भाग ही उनका अन्तःपुर था