Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 50, Verse 11
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 50, verse 11 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 50 · श्लोक 11
संस्कृत श्लोक
आर्तवस्तनधारिण्यो लग्नसूर्यांशुकुङ्कुमाः ।
विचित्रकुसुमोपेताश्चन्द्रांशुसितचन्दनाः ॥ ११ ॥
हिन्दी अर्थ
तत् तत् ऋतुओं में उत्पन्न
होनेवाले फूल, पल्लव आदि ही स्तन वस्त्र (चोली) थे, सूर्यकिरणरूपी कुकुम उनमें लगे थे, विचित्र
कुसुमों से वह युक्त थी और चाँदनी ही उनका सफेद चन्दन था