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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 50, Verse 7

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 50, verse 7 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 50 · श्लोक 7

संस्कृत श्लोक

धृतप्रफुल्लपद्मिन्यः सुगन्धिमुखमारुताः । नीलघुंघुमकाकल्यो निर्झरारावनूपुराः ॥ ७ ॥

हिन्दी अर्थ

खिले हुए कमल के तालाब उन्होने धारण कर रक्खे थे, उनके मुख के निःश्वास वायु सुगन्धित थे भँवर, कोकिल आदि ध्वनियाँ ही उनके मधुर आलाप थे तथा झरनों के झर्झर शब्द ही उनके नूपुर थे