Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 50, Verse 8
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 50, verse 8 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 50 · श्लोक 8
संस्कृत श्लोक
द्युमूर्धानो महीपादा वनालीरोमराजयः ।
जङ्गलोरुनितम्बिन्यश्चन्द्रार्ककृतकुण्डलाः ॥ ८ ॥
हिन्दी अर्थ
द्युलोक ही उनका मस्तक था, पृथिवी उनकी चरणरूप
थी । वृक्ष पंक्तियाँ ही उनकी रोमराशिर्यो थी, वन ही उनके विशाल नितम्ब थे, चन्द्रमा और सूर्य को
उन्होंने अपने कुण्डल बना रक्खा था