Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 53, Verse 31

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 53, verse 31 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 53 · श्लोक 31

संस्कृत श्लोक

क्षणं विरतिमायाति रतिमेति क्षणं स्वयम् । क्षणं विकारमायाति संकल्पेनैव बालवत् ॥ ३१ ॥

हिन्दी अर्थ

बालक के समान संकल्प से ही वह स्वयं एक क्षण में विरक्त होता है, क्षण भर में स्वयं अनुराग को प्राप्त होता है ओर क्षणभर में विकार को प्राप्त होता है