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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 53, Verses 32–33

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 53, verses 32–33 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 53 · श्लोक 32

संस्कृत श्लोक

एनं सकलभावेभ्यः कृत्वा निर्मूलमादरात् । मतिरन्तःपदं याति यथा पुत्र तथा कुरु ॥ ३२ ॥ त्रयस्तस्या मतेर्देहा अधमोत्तममध्यमाः । तमःसत्त्वरजःसंज्ञाः कारणं जगतः स्थितेः ॥ ३३ ॥

हिन्दी अर्थ

खोत्थ की आख्यायिका के वर्णन का प्रयोजन कहते हैं। हे पुत्र, बुद्धि इस संकल्प को सब बाह्य वस्तुओं से लोटाकर, समाधि के अभ्यास से ओर तत्त्वज्ञान से निर्वासनिक बनाकर, प्रत्यग्भूत ब्रह्म का अवलम्बन कर जिस प्रकार विश्रान्त हो, वैसा तुम करो