Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 53, Verse 35
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 53, verse 35 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 53 · श्लोक 35
संस्कृत श्लोक
सत्त्वरूपो हि संकल्पो धर्मज्ञानपरायणः ।
अदूरकेवलीभावं स्वाराज्यमधितिष्ठति ॥ ३५ ॥
हिन्दी अर्थ
सत्त्वरूप संकल्प धर्म और ज्ञान में परायण होकर
स्वराज्य को (हिरण्यगर्भ भावपर्यन्त देवताभाव को) प्राप्त होता है जिसमें मोक्ष सन्निहित है