Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 53, Verse 43
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 53, verse 43 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 53 · श्लोक 43
संस्कृत श्लोक
अनाबाधेऽविकारे च सुखे परमपावने ।
संकल्पोपशमे यत्नं पौरुषेण परं कुरु ॥ ४३ ॥
हिन्दी अर्थ
वह संकल्प की निवृत्ति ब्रह्मस्वरूप ही है, इस आशय से कहते हैं।
बाधरहित, अविकारी, परमपवित्र, सुखरूप संकल्प की निवृत्ति के लिए साधनचतुष्टय सम्पत्ति,
श्रवण, मनन तथा निदिध्यासन रूप परम यत्न पौरुष से करो