Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 53, Verse 8
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 53, verse 8 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 53 · श्लोक 8
संस्कृत श्लोक
ब्रह्मविष्ण्विन्द्ररुद्राद्यास्तस्यैवावयवान्विदुः ।
विटपानिव वृक्षस्य शृङ्गाणीव महीभृतः ॥ ८ ॥
हिन्दी अर्थ
यदि कोई शंका करे ब्रह्मा, विष्णु आदि से जगत की उत्पत्ति हुई है, ऐसा सुना जाता है, फिर कैसे
आप अन्य से उसकी उत्पत्ति कहते हैं ? तो इस पर कहते हैं।
जैसे लोग शाखाओं को वृक्षों के अवयव मानते हैं, जैसे शिखरों को पर्वतों के अवयव मानते हैं, वैसे
ही ब्रह्मा, विष्णु, इन्द्र, रुद्र आदि को संकल्प के ही अवयव जानते हैं