Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 58, Verse 12
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 58, verse 12 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 58 · श्लोक 12
संस्कृत श्लोक
व्यपगतकलनाकलङ्कशुद्धो हृदयनिरन्तरलीनवातवृत्तिः ।
गतघनशरदाशयोपमानः स्थित इति राम कचः स गायमानः ॥ १२ ॥
हिन्दी अर्थ
उसी स्थिति को दशति हुए उपसंहार करते हैं।
हे श्रीरामचन्द्रजी, कल्पनारूपी कलंक से रहित अतएव शुद्ध एवं जिनका प्राणस्पन्दन हृदय में
निरन्तर लीन हो गया, इसलिए जिससे मेघ हट गये, ऐसे शरत्काल के आकाश के समान निर्मल वे
महात्मा कच गाते हुए स्थित रहे