Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 58, Verse 3
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 58, verse 3 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 58 · श्लोक 3
संस्कृत श्लोक
सम्यग्ज्ञानामृतापूर्णा मतिर्नारमतास्य सा ।
पञ्चभूतमयेऽमान्ये दृश्येऽस्मिन्पेलवात्मनि ॥ ३ ॥
हिन्दी अर्थ
उनकी आत्मज्ञान के अमृत से परिपूर्ण वह मति पंचभूतों से निर्मित, अनादर के योग्य इस
मिथ्या दृश्य प्रपंच में नहीं रमी