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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 59, Verse 24

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 59, verse 24 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 59 · श्लोक 24

संस्कृत श्लोक

संकल्पयन्तो यान्यांस्ते नानाभूतगणान्बहून् । भूतेष्वन्यांस्तु तेष्वन्यांस्तेष्वन्यान्विविधानपि ॥ २४ ॥

हिन्दी अर्थ

उनसे देव, दानव, यक्ष, राक्षस, मनुष्य आदि की सृष्टि का प्रवाह कहते हैं। वे प्रजापति जिन-जिनका पुत्र, पौत्र आदि परम्परा से ओर देव, दानव आदि जाति भेदं से विविध प्रकार एवं व्यक्तिभेद से बहुत भूतगणो का संकल्प करते थे, उन-उन को प्राप्त करते थे। उन भूतो में आगे मैथुन सृष्टि का प्रवाह दशति है। उन भूतो में बहुत से ओरों का, उनमें ओरो का, उनमें औरों का संकल्प करते हुए उनको प्राप्त करते थे