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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 59, Verse 25

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 59, verse 25 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 59 · श्लोक 25

संस्कृत श्लोक

संस्मृत्य वेदांस्तदनु यज्ञक्रमगुणान्बहून् । जगद्ग्रहादयं ब्रह्मा मर्यादां समकल्पयत् ॥ २५ ॥

हिन्दी अर्थ

तदन्तर यज्ञादि कर्मो की प्रवृत्ति दिखलाते है । तदनन्तर वेदों का स्मरण कर फिर बहुत से यज्ञो के गुण ओर क्रम का स्मरण कर ब्रह्मा ने जगद्रूषी घर के लिए मर्यादा की कल्पना की