Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 59, Verse 38
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 59, verse 38 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 59 · श्लोक 38
संस्कृत श्लोक
तमासाद्य तदाभासे पदे गलितमानसे ।
सुखं तिष्ठति शान्तात्मा तल्पेऽधः श्रमवानिव ॥ ३८ ॥
हिन्दी अर्थ
उस परमात्मा को स्मरणमात्र से प्राप्त कर, जहाँ चारों ओर एकमात्र उन्हींका
प्रकाश है, मानस व्यापाररहित यानी सप्तमभूमिका रूप उस पद में शान्त आत्मावाले ब्रह्मा सुखपूर्वक
ऐसे स्थित होते हैं, जैसे थका हुआ पुरुष भली-भाँति बिछाये हुए बिछौने पर स्थित होता है