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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 59, Verse 46

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 59, verse 46 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 59 · श्लोक 46

संस्कृत श्लोक

कदाचित्केवलं सर्वसंकल्पपरिहीनया । यदृच्छयानुग्रहार्थं लोकक्रमवदास्थितः ॥ ४६ ॥

हिन्दी अर्थ

किसी समय सब संकल्पो से हीन स्वेच्छामात्र से केवल लोगों के अनुग्रह के लिए ही लोक के सदुश कार्य करते हुए स्थित होते हैं