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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 59, Verse 48

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 59, verse 48 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 59 · श्लोक 48

संस्कृत श्लोक

सर्वभावसमारम्भः समः सर्वासु वृत्तिषु । परिपूर्णार्णवाकारो मुक्तशेषोऽवतिष्ठते ॥ ४८ ॥

हिन्दी अर्थ

सब भावों का आरम्भ करनेवाले ब्रह्मा सब वृत्तियों में समान और परिपूर्ण सागर के समान आकारवाले मुक्तरूप होकर स्थित रहते हैं