Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 59, Verse 49
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 59, verse 49 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 59 · श्लोक 49
संस्कृत श्लोक
कदाचित्केवलं सर्वसंकल्पपरिहीनया ।
यदृच्छयानुग्रहार्थ लोकानां प्रतिबुध्यते ॥ ४९ ॥
हिन्दी अर्थ
किसी समय सम्पूर्ण संकल्पों से रहित अपनी स्वेच्छा से केवल लोगों के अनुग्रह के लिए ही वे प्रतिबद्ध
होते हैं