Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 59, Verse 50

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 59, verse 50 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 59 · श्लोक 50

संस्कृत श्लोक

एषाब्राह्मी स्थितिः पुण्या या मयोक्ता महामते । यातां विधिसुरानीकौ तामेतां सात्त्विकीमपि ॥ ५० ॥

हिन्दी अर्थ

हे महामते, जो मैंने आपसे कही, यह परम पवित्र ब्राह्म स्थिति हे । प्रजापतियों की मानसिक सृष्टि पहला विध्यनीक (ब्रह्मा आदि का दल) है, क्योकि प्रजापतियों को संकल्प से सिद्धियाँ प्राप्त हैं एवं ज्ञान और योगरूप ऐश्वर्य स्वयं ही उन्हें ज्ञात है । मैथुनसृष्टि में भी देव, गन्धर्व, यक्ष आदि के सात्त्विक होने के कारण एक बार के उपदेश से ज्ञानरूप ऐश्वर्य को प्राप्त हुआ देवानीक (देवता का दल) मध्यम है। मनुष्य आदि तो रजोगुण और तमोगुण से ग्रस्त हैं हजारों प्रयत्नों से उन्हें ज्ञानरूप ऐश्वर्य प्राप्त हो सकता है, अतएव नरानीक (मनुष्यों का दल) अधम है। यों तीन अनीकों का विभाग अपने मन में रखकर उनकी अपने कारण से प्राप्त चित्तशुद्धि के अनुरूप ज्ञान से ब्रह्म प्राप्ति को पृथक्‌ पृथक्‌ दर्शोतें हैं। पूर्वोक्त इस सात्त्विक ब्राह्म स्थिति को विध्यनीक और सुरानीक भी प्राप्त हो