Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 60, Verse 11
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 60, verse 11 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 60 · श्लोक 11
संस्कृत श्लोक
क्षीराम्बुधिनिधौ लोलैः पाण्डुवद्रश्मिभिर्जगत् ।
ततस्तेष्वतिरम्येषु चन्द्ररश्मिषु संपतत् ॥ ११ ॥
हिन्दी अर्थ
तदनन्तर उन चन्द्रकिरणों के नन्दन आदि वन में
गिरने पर किरणों के साथ गिर रही वह जीवपरम्परा उस वन में जैसे दासी घर के कार्यों में व्यग्र रहती है
वैसे ही व्यग्र हो पक्षी के तुल्य प्रवेश करती है