Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 60, Verse 12
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 60, verse 12 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 60 · श्लोक 12
संस्कृत श्लोक
करोति विहगी लोला वने प्रेष्यान्तरेष्विव ।
तेभ्योऽपि स्वरसेनैव यान्ति पीवरतामपि ॥ १२ ॥
हिन्दी अर्थ
उस वन में फल चन्द्रमा की और सूर्य की किरणों के
लगने से अपने रस से क्रमश: वृद्धि ओर मधुरता को प्राप्त होते हैं