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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 62, Verse 21

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 62, verse 21 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 62 · श्लोक 21

संस्कृत श्लोक

पाश्चात्यजन्मनि विवेकमहामहिम्ना युक्ते त्वयि प्रसृतसर्वगुणाभिरामे । सत्त्वस्थकर्मणि पदं कुरु रामभद्र मैषा करोतु भवसङ्गविमोहचिन्ता ॥ २१ ॥

हिन्दी अर्थ

हे श्रीरामचन्द्रजी, विवेक की विपुल महिमा से युक्त, बढ़े हुए शम, दम आदि गुणों से मनोहर इस अन्तिम जीवन्मुक्त शरीर के प्राप्त होने पर आप जीवन्मुक्त पुरुषों के सप्तम भूमिका रूप कर्म में स्थिति कीजिये । यह वैराग्य प्रकरण में कही गई सब लोगों में प्रसिद्ध संसार प्राप्ति से होनेवाली मोह चिन्ता आपमें स्थित न हो