Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 62, Verse 23
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 62, verse 23 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 62 · श्लोक 23
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हिन्दी अर्थ
हे निष्पाप राघव, मैंने जो यह आपसे वाग्जाल यानी तत्त्वोपदेश के रूप में जो वचन कहे हैं, उनसे
चित्तरूपी पक्षी को बाँधकर तथा हृदय में रोककर आत्मरूपता प्राप्त कीजिए