Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 7, Verse 28
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 7, verse 28 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 7 · श्लोक 28
संस्कृत श्लोक
चन्द्रांशुरसपानेन चकोरी चपला यथा ।
मामिमां चरणालीनां भ्रमरीं करपल्लवैः ॥ २८ ॥
हिन्दी अर्थ
हे प्राणनाथ, चरणों में लीन हूई इस भ्रमरी रूप मेरे हाथरूपी
पल्लवो से आलिंगन कर आप मुझे स्नेह-दयारूपी अमृत से भरे हुए अपने कमलरूपी हृदय में धारण
कीजिये