Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 1, Verse 20
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 1, verse 20 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 1 · श्लोक 20
संस्कृत श्लोक
त्वमप्युत्तिष्ठ सुभग समस्ताचारसत्क्रियाम् ।
आचराचारचतुरस्नानदानार्चनादिकाम् ॥ २० ॥
हिन्दी अर्थ
हे सुन्दर, आप भी उठिए । हे आचारचतुर,
स्नान, दान, अर्चन, पूजन आदिरूप सब सत्क्रियाओं का अनुष्ठान कीजिए