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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 12, Verse 40

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 12, verse 40 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 12 · श्लोक 40

संस्कृत श्लोक

पदमतुलमुपैतुमिच्छतोच्चैः प्रथममियं मतिरेव लालनीया । फलमभिलषता कृषीवलेन प्रथमतरं ननु कृष्यते धरैव ॥ ४० ॥

हिन्दी अर्थ

उन्नत अनुपम पद में पहुँचने की इच्छावाले पुरुष को पहले इस मति का ही क्रमशः विवेकशिक्षा द्वारा शोधन करना चाहिये । धान्य आदि की अभिवृद्धि चाहने वाला कृषक सबसे पहले पृथिवी को ही जोतता है