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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 13, Verse 66

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 13, verse 66 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 13 · श्लोक 66

संस्कृत श्लोक

लिपिकर्मनृपैर्युद्धं क्व कृतं घर्घरारवम् । क्वचिन्न चन्द्रकिरणैरोषध्यः प्रतिबोधिताः ॥ ६६ ॥

हिन्दी अर्थ

अचेतन अन्तःकरणवृत्ति आदि मे नित्यचित्‌ की सन्निधि के अभाव में विषयोन्मुख प्रवृत्ति ही नहीं हो सकती, उनकी प्रकाशता तो दूर रही, इस आशय से कहते है। क्या कहीं चित्रलिखित राजाओं ने कोलाहल से भरा हुआ युद्ध किया ? क्या चन्द्रमा की किरणों द्वारा वनस्पतियाँ कहीं आप्यायित हुई हैं