Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 16, Verse 11
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 16, verse 11 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 16 · श्लोक 11
संस्कृत श्लोक
अहंकारमयीं त्यक्त्वा वासनां लीलयैव यः ।
तिष्ठति ध्येयसंत्यागी जीवन्मुक्तः स उच्यते ॥ ११ ॥
हिन्दी अर्थ
अहंकारमयी वासना का त्याग कर जो लोकसंग्रहोचित व्यवहार से स्थित रहता है, ध्येय
वासना त्यागवाला वह जीवन्मुक्त कहलाता है