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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 16, Verses 12–13

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 16, verses 12–13 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 16 · श्लोक 12,13

संस्कृत श्लोक

निर्मूलकलनां त्यक्त्वा वासनां यः शमं गतः । ज्ञेयत्यागमयं विद्धि मुक्तं तं रघुनन्दन ॥ १२ ॥ ध्येयं तं वासनात्यागं कृत्वा तिष्ठन्ति लीलया । जीवन्मुक्ता महात्मानः सुजना जनकादयः ॥ १३ ॥

हिन्दी अर्थ

हे रघुनंदन, मूल अज्ञान के साथ कलनारूप वासना का त्यागकर जो पुरुष शम को प्राप्त हुआ, उसे ज्ञेयत्यागमय (जिसके वासना सहित अज्ञान का नाश होकर चिन्मात्र का अवशेष है) मुक्त जानिये । पूर्वोक्त ध्येय वासना त्याग करके जीवन्मुक्त महात्मा, सज्जनशिरोमणि जनक आदि लोकसंग्रहोचित व्यवहार से स्थित रहते हैं