Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 20, Verses 14–21
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 20, verses 14–21 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 20 · श्लोक 14-21
संस्कृत श्लोक
बभूविथ दशार्णेषु कपिलो वनवानरः ।
राजपुत्रस्तुषारेषु पुण्ड्रेषु वनवायसः ॥ १४ ॥
हैहयेषु च मातङ्गस्त्रिगर्तेषु च गर्दभः ।
शाल्वेषु सरमापुत्रः पतत्री सरलद्रुमे ॥ १५ ॥
विन्ध्याद्रौ पिप्पलो भूत्वा घुणो भूत्वा महावटे ।
मन्दरे कुक्कुटो भूत्वा विप्रो जातोऽसि कन्दरे ॥ १६ ॥
कोसलेषु द्विजो भूत्वा भूत्वा वङ्गेषु तित्तिरिः ।
अश्वो भूत्वा तुषारेषु जातस्त्वं ब्रह्मणोऽध्वरे ॥ १७ ॥
यः कीटस्तालकन्दान्तर्मशको य उदुम्बरे ।
यः प्राग्बको विन्ध्यवने स त्वं पुत्र ममानुजः ॥ १८ ॥
हिमवत्कन्दरे भूर्जतनुत्वग्ग्रन्थिकोटरे ।
पिपीलिको यः षण्मासान्सोऽयं त्वमनुजो मम ॥ १९ ॥
स्थितः सीमान्तकुग्रामगोमये यश्च वृश्चिकः ।
सार्धसंवत्सरं साधो सोऽयं त्वमनुजो मम ॥ २० ॥
पुलिन्दीस्तनपीठेषु निलीनं येन कानने ।
षट्पदेनेव पद्मेषु सोऽयं त्वमनुजो मम ॥ २१ ॥
हिन्दी अर्थ
अब योगबल से देखे गये भाई के विविध जन्मो का विशेषरूप से स्मरण कराते हुए कहते हैँ ।
हे वत्स, तुम दर्शार्ण देश में कपिल वनवानर हुए थे, तुषार देश में राजपुत्र हुए थे ओर पौण्ड देश में
जंगली कौवा हुए थे। हैहय देश में हाथी हुए थे त्रिगर्तदेश में गधा हुए थे, शाल्व प्रदेश में कुत्ता हुए थे और
वहीं चीड़ के पेड़ पर पक्षी हुए थे। विन्ध्याचल में पीपल होकर, बड़े भारी वट के वृक्ष में घुन होकर और
मन्दराचल में मुर्गा होकर मन्दराचल की ही गुफा में तुम ब्राह्मण हुए थे । कोशल देश में ब्राह्मण होकर,
वंग देश में तीतर होकर ओर तुषार देश में घोड़ा होकर तुम पुष्कर में प्रसिद्ध ब्रह्मा के यज्ञ में पशु हुए थे ।
जो पहले विन्ध्य के वन में ताड़ के वृक्ष की जड़ के भीतर कीड़ा हुआ था, जो गूलर के फूल में मच्छर हुआ
था और जो बगुला हुआ था, हे वत्स, वह तुम अब मेरे भाई हुए हो । हिमालय की कन्दरा में भोजपत्र के
वृक्ष की पतली त्वचा के भीतर छः मास तक जो चींटा हुआ था, वही तुम मेरे अनुज हुए हो। स्वदेश सीमा
के अन्त में जो छोटा-सा गाँव है, वहाँ के कंडों के ढेर में जो छः महीने तक बिच्छूरूप से स्थित रहा, हे
साधो, वही तुम मेरे भाई हो। जो वन में शबरी के बच्चे का जन्म पाकर जैसे पयो मे भ्रमर लीन होता है
वैसे ही शबरी के स्तनों के ऊपर छिपा, वही तुम मेरे भाई हो