Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 20, Verse 8
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 20, verse 8 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 20 · श्लोक 8
संस्कृत श्लोक
असि चेत्त्वं तदन्येषु यातेषु बहुजन्मसु ।
ये बन्धवो ये विभवाः किं तानपि न शोचसि ॥ ८ ॥
हिन्दी अर्थ
यदि लिंग शरीर ही अपार मेरे बन्धु हैं, ऐसा मानो, तो इस पर चुनो, ऐसा कहते है ।
यदि तुम मुझसे पृथक् लिंगात्मा हो, तो व्यतीत अनेक जन्मों में तुम्हारे जो बंधु ओर जो धन,
सम्पत्ति आदि थे, उनके लिए भी तुम शोक क्यों नहीं करते ?