Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 21, Verse 7
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 21, verse 7 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 21 · श्लोक 7
संस्कृत श्लोक
ध्येयत्यागरथारूढः करुणोदारया दृशा ।
लोकमालोकयन्दीनमातिष्ठोत्तिष्ठ राघव ॥ ७ ॥
हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामचन्द्रजी,
उठिये ओर पूर्वोक्त ध्येय वासना त्यागरूपी रथ में बैठे हुए आप सब भूतो के ऊपर कृपा से उदारदृष्टि
द्वारा दीन लोगों को देखते हुए प्रकृत व्यवहार का अनुष्ठान कीजिये