Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 28, Verses 8–9
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 28, verses 8–9 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 28 · श्लोक 8,9
संस्कृत श्लोक
तं दृष्ट्वा कृतकर्तव्यप्रणामास्ते महासुराः ।
विषादविस्मयानन्दभयमन्थरतां ययुः ॥ ८ ॥
मन्त्रिणः प्रविचार्यात्र किं प्राप्तमिति दानवाः ।
भार्गवं चिन्तयामासुर्गुरुं सर्वविदांवरम् ॥ ९ ॥
हिन्दी अर्थ
राजा बलि का दर्शन कर अवश्य कर्तव्य प्रणाम आदि कर चुके वे महाअसुर बलि के प्राणों का
सन्देह होने से विषादवश गम्भीर हुए, उसी प्रसन्नता ओर आनन्द देखने से विस्मत हुए, रोमांच आदि
आनन्द के चिह्न न देखने से आनन्दित ओर अपना रक्षक न देखने से भयभीत हुए । दानव मन्त्रयां ने
यहाँ पर क्या करना चाहिये, यह विचार कर सब ज्ञाताओं में श्रेष्ठ गुरु शुक्राचार्य का स्मरण किया