Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 29, Verse 50
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 29, verse 50 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 29 · श्लोक 50
संस्कृत श्लोक
त्वयि स्थिते जगन्नाथे चिदादित्ये सदोदिते ।
इदमाभासते सर्वं संसारस्वप्नमण्डनम् ॥ ५० ॥
हिन्दी अर्थ
आपके चैतन्य बल से ही यह जगत सिद्ध है, ऐसा कहते हैं।
चिदादित्यरूप सदा प्रकाशमान जगत के अधिपति आपके स्थित होने पर ही यह संसाररूपी स्वप्न
आभासित होता है