Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 29, Verse 51
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 29, verse 51 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 29 · श्लोक 51
संस्कृत श्लोक
मा विषादं कृथा व्यर्थं सुखदुःखैषणा न ते ।
शुद्धचित्तोऽसि सर्वात्मा सर्ववस्त्ववभासकः ॥ ५१ ॥
हिन्दी अर्थ
आप व्यर्थ विषाद मत करो, आपको सुख और दुःख की अभिलाषा नहीं है,
आप शुद्धचित्त, सबके आत्मा और सब वस्तुओं के प्रकाशक हैं