Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 31, Verse 25
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 31, verse 25 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 31 · श्लोक 25
संस्कृत श्लोक
तेनासुरपुरन्ध्रीणां नित्यं मण्डनमण्डने ।
मुखपद्मे स्थितं बाष्पमब्जिनीनां हिमं यथा ॥ २५ ॥
हिन्दी अर्थ
भगवान के पराक्रम से अलंकारों को भी अलंकृत करनेवाले
असुरनारियों के मुखारविन्द पर कमलिनियों के मुखभूत कमल पर हिम के समान आँसू सदा बने रहते
हैं