Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 31, Verse 26
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 31, verse 26 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 31 · श्लोक 26
संस्कृत श्लोक
शीर्णभिन्नलुठद्भित्तिर्जगज्जरठमण्डपः ।
अयं नीलमणिस्तम्भैस्तद्भुजैरेव धार्यते ॥ २६ ॥
हिन्दी अर्थ
जगद्रूपी जीर्ण-शीर्ण मकान की जीर्ण-शीर्ण, टूटी-फूटी दीवारें गिर रही है, उसे नीलमणि
के स्तम्भरूप भगवान की भुजाओं द्वारा सम्हाला जाता है