Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 33, Verse 8
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 33, verse 8 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 33 · श्लोक 8
संस्कृत श्लोक
प्रह्लादं प्रति गीर्वाणास्ततः स्निग्धत्वमाययुः ।
महान्तो यत्र नोद्विग्नास्तत्र विश्वासवन्मनः ॥ ८ ॥
हिन्दी अर्थ
तवसे
प्रह्लाद के प्रति देवताओं की मित्रता हो गई। जिस पुरुष या विषय में अपने पूजनीय पिता, आचार्य आदि
उद्विग्न नहीं हुए, उसमें बालकों का भी मन विश्वासी हो जाता है, यह प्रसिद्ध है