Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 34, Verse 44
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 34, verse 44 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 34 · श्लोक 44
संस्कृत श्लोक
अहमस्मिन्समुद्भूतः पद्मासनगतः सदा ।
निर्विकल्पसमाधिस्थः परां निर्वृतिमागतः ॥ ४४ ॥
हिन्दी अर्थ
इस जगत् मे सदा पद्मासन आसीन होकर
निर्विकल्प समाधि में स्थित परम सुख को प्राप्त मैं ब्रह्मारूप से उत्पन्न हुआ हूँ