Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 36, Verses 20–21
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 36, verses 20–21 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 36 · श्लोक 20,21
संस्कृत श्लोक
वेदवेदान्तसिद्धान्ततर्कपौराणगीतिभिः ।
यो गीतः स कथं ह्यात्मा विज्ञातो याति विस्मृतिं ॥ २० ॥
सैवेह देहभोगाली सुभगापीयमद्य मे ।
अन्तर्न स्वदते स्वच्छे त्वयि दृष्टे परावरे ॥ २१ ॥
हिन्दी अर्थ
वेद-
वेदांत के सिद्धान्त, तर्क, पुराण के गीत आदि से जिनका वर्णन हुआ वह विज्ञात आत्मा केसे विस्मृति
को प्राप्त होता है ? स्वच्छ परब्रह्म परमात्मरूप आपका साक्षात्कार होने पर वे ही सुन्दर देह के भोग
आज मुझे यह पहले के समान अच्छे नहीं लगते