Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 36, Verse 28

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 36, verse 28 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 36 · श्लोक 28

संस्कृत श्लोक

मनः प्रक्षोभमायाति स्फुरन्तीन्द्रियवृत्तयः । शक्तिरुल्लसति स्फारा प्राणापानप्रवाहिनी ॥ २८ ॥

हिन्दी अर्थ

यदि कोई प्रश्न करे कि प्रत्यक्‌ स्वभाव मे ही रहते हैं, यह कैसे जाना ? तो इस पर कहते है । आपसे प्रेरित मन क्षोभ को प्राप्त होता है, आपकी प्रेरणा से चक्षु आदि इन्द्रियों की वृत्तिर्या स्फुरित होती हे, प्राण ओर अपान में प्रवाहित होनेवाली प्रचुर शक्ति उल्लास को प्राप्त होती है । "केनेषितं पतति प्रेषितं मनः ।” इत्यादि श्रुति में प्रदर्शित मन आदि की चुम्बक के समान प्रेरणा से हमें यह ज्ञात हुआ, यह अर्थ है