Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 36, Verse 29
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 36, verse 29 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 36 · श्लोक 29
संस्कृत श्लोक
वहन्ति देहयन्त्राणि कृष्टान्याशावरत्रया चर्ममांसास्थिदिग्धानि मनःसारथिमन्ति च ॥ २९ ॥
हिन्दी अर्थ
आशारूपी रस्सी से खींचे गये, चर्म, मांस और हड्डियों से व्याप्त मनरूपी सारथि से युक्त शरीररूपी
यन्त्र आपसे प्रेरित होकर चलते हैं